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SHIKHAR Mains 2023 Day 20 Model Answer Hindi

Updated : 1st Jul 2023
SHIKHAR Mains 2023 Day 20 Model Answer Hindi

Q1: निम्नलिखित उद्धरण का आपके विचार से क्या अभिप्राय है?

"भाईचारे के बिना, स्वतंत्रता, और समानता जैसे एक प्राकृतिक विषय वस्तु  नहीं बन सकता है।" - बी. आर. अम्बेडकर 

What do the following quotations mean to you?

"Without fraternity, liberty and equality could not become a natural course of things.." - B. R. ambedkar

 

दृष्टिकोण 

  • भूमिका में समाज के कमजोर वर्गों के लिए बाबासाहेब अंबेडकर के योगदान को लिखिए।

  • तर्कों के साथ यह बताएं कि  स्वतंत्रता और समानता के लिए भाईचारा कितना जरूरी है।

  • भारतीय समाज में बंधुत्व के महत्व के साथ निष्कर्ष दीजिए।

 

उत्तर -

बाबासाहेब अंबेडकर को हमेशा आधुनिक भारत के संघर्ष में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। वह तथाकथित अछूतों की समानता और अधिकारों के मुखर  समर्थक थे। वह एक ऐसे देशभक्त थे जो हमेशा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व में विश्वास करते थे।

 

बंधुत्व स्वतंत्रता और समानता के लिए एक पूर्व-शर्त है:

  • बंधुत्व का अर्थ है सभी भारतीयों में  भाईचारे की भावना - भारतीयों के नाते एक  होना। यह वह सिद्धांत है जो सामाजिक जीवन को एकता में पिरो देता है। बन्धुत्व के बिना समाज में समानता और स्वतंत्रता हासिल करना मुश्किल है। भारतीय समाज में लोगों ने खुद को विभिन्न जातियों और धर्मों में विभाजित कर रखा है।

  • विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग एक दूसरे को पदानुक्रम में रखते हैं। वे एक दूसरे को समाज में समान प्रतिभागियों के रूप में नहीं देखते हैं। वर्तमान समय में जाति और धर्म के आधार पर घृणा और कट्टरता बढ़ रही है जो लिंचिंग और दंगों की घटनाओं से स्पष्ट हो रही है।

  • ऐसी चीजों का सबसे बड़ा कारण लोगों में बन्धुत्व का नहीं होना है। लोग राष्ट्रहित से  ऊपर अपनी जाति और धर्म  को मानते  हैं।

 

सहानुभूति के रूप में बंधुत्व:

  • वर्तमान समय में बंधुत्व का अर्थ है दैनिक  जीवन में मनुष्यों द्वारा अनुभव की जाने वाली विभिन्न गतिविधियाँ जैसे कि भिन्न-भिन्न प्रकार के कपड़े पहनना, विभिन्न देवताओं की पूजा करना, विभिन्न भाषाएं बोलना, अलग-अलग राजनीतिक विचारों का अनुसरण करना, वास्तव में सभी में एक जैसी ही निहित मानव गरिमा  और भावना ,सपने, आशाएं, निराशाएं , दर्द, खुशी, क्रोध, प्यार, विजय और पराजय का अनुभव करते हैं ।

  • भाईचारे को कल्पना की आवश्यकता होती है कि दूसरा कैसा महसूस करता है। इसके लिए दूसरे के  दुख और अपमान को महसूस करने और यह सोचने की आवश्यकता है कि कभी हम एक ही थे। तभी हम सब लोगों को बराबरी का मान सकते हैं।

  • बंधुत्व तभी बढ़ेगा जब  हम सोचेंगे कि पीड़ित व्यक्ति  भी मुझसे जुड़ा है और  यह महसूस  कर सकूँ कि वह मेरे जैसा ही है,तभी मैं  बेहतर कल्पना कर सकूँगा  कि दूसरा व्यक्ति क्या महसूस कर रहा है।

 

एकजुटता के रूप में बंधुत्व :

  • अगर हम एक ऐसे समाज को प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं जहाँ सभी को समाज में समान दर्जा प्राप्त है तो एकजुटता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • हम केवल अपनी समस्याओं से निपटने के लिए अन्याय से  पीड़ितों को नहीं छोड़ सकते। सामाजिक एकजुटता  से  बने समाज में  जब हिंसा अल्पसंख्यकों को कम कर देती है, तो बहुसंख्यक वर्ग के लोग बाहर निकल कर न्याय की लड़ाई लड़ते हैं और ऊंची जाति के पुरुष और महिलाएं जातिगत भेदभाव का विरोध  करते हैं।

  • भारत में हम तभी आंदोलन करते हैं जब हमारे जाति या धर्म  से अन्याय होता  है। हमें  सभी जाति और धर्म के लोगों से  एकजुटता रखनी  होगी।

 

निष्कर्ष: यदि हम उस संवैधानिक सपने को साकार करना चाहते हैं जिसका सभी के लिए समान मूल्य है और हर किसी को सामाजिक प्रतिबंधों के बिना अपने सपनों को हासिल करने की स्वतंत्रता है, तो बंधुत्व ही एक ऐसी चीज है जिसे हमें राष्ट्र के रूप में वर्तमान समय में हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।

 

Q2: पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसकी प्रासंगिकता  का परीक्षण कीजिये?  

While explaining the concept of Integral Humanism of Pandit Deendayal Upadhyaya, examine its relevance? 

 

दृष्टिकोण:

  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की व्याख्या कीजिए।

  • वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए ।

 

उत्तर:

पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुमुखी प्रतिभा के धनी  दार्शनिक, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री एवं राजनीतिज्ञ थे। इन्होने अंत्योदय और  एकात्म मानव  दर्शन की अवधारणा को  प्रस्तुत किया ।  यह दर्शन सम्पूर्ण समाज ,संस्कृति  और समजा के इकाई के रूप मे व्यक्ति  के समेकित उन्नयन का दर्शन है । इस दर्शन  के केंद्र में मानव है ।  

पंडित दीन दायल उपाध्याय ने पूंजीवाद और समाजवादी विचारधारा का विरोध किया । इनके अनुसार ये दोनों विचारधाराएँ भौतिकवादी उद्देश्य पर आधारित है ।जबकि मानव के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक विकास के साथ -साथ आत्मिक विकास की भी आवश्यकता होती है । इसके साथ ही साथ ही, उन्होंने एक वर्गहीन, जातिहीन और संघर्ष मुक्त सामाजिक व्यवस्था की कल्पना की थी। 

 

एकात्म मानव वाद की की अवधारणा  में व्यक्ति को समग्रता से देखने का दृष्टिकोण निहित है। व्यक्ति  के पास केवल शरीर  ही नहीं है  बल्कि मन , बुद्धि  और आत्मा भी है । यदि इनमे से किसी एक तत्व की उपेक्षा की जाए तो व्यक्ति का सुख अर्थहीन हो जाएगी । इसी प्रकार मानव, पशु या पादप वर्ग की सभी विभिन्न आत्माओं की एकात्मता को स्वीकार कर अन्तर्निहित विविधता को अस्वीकार किया । 

 एकात्म मानववाद की वर्तमान प्रासंगिकता-

  • आज वैश्वीकरण ने एक ओर भौतिकता को बढ़ावा दिया वही दूसरी ओर सामाजिक गतिरोध की स्थित भी उत्पन्न कर दिया ।प्रवसन और  विघटन (सामाजिक ,राजनीतिक आदि )  को बढ़ावा दिया है ।एकात्म मानववाद  ने अति भौतिकता का विरोध किया । 

  • संसाधनो का समुचित वितरण न होने से अमीरों और गरीबो के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है ।  अंत्योदय के माध्यम से  संसाधनो के प्राप्त लाभों  में  कमजोर वर्गों की भागीदारी को सुनिश्चित करने का दृष्टिकोण निहित है । 

  • बढ़ते कुपोषण , गरीबी , बेरोजगारी  आदि के कारण  समावेशी विकास नही हो प रहा है । समावेशी विकास को बढ़ावा देने मे एकात्म मानववाद  का दर्शन  अधिक प्रभावी है । 

  • एकात्म मानववाद का दर्शन लोकतंत्र, सामाजिक समानता तथा मानवाधिकारों के विचारों का भी समर्थन करता है, चूंकि सभी धर्मों और जातियों का सम्मान तथा उनकी समानता धर्मराज्य की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।

  • आज भी समाज विभिन्न वर्गों , जातियों, समुदायों में बंटा हुआ है । एकात्म मानव वाद मे वर्गहीन, जातिहीन और संघर्ष मुक्त सामाजिक व्यवस्था की कल्पना की है जिससे एक वहतर समाज का निर्माण  हो सकें । 

  • एकात्म मानववाद मानव के गरिमापूर्ण जीवन जीने के दृष्टिकोण पर आधारित दर्शन है। भारत जैसे कल्याणकारी राज्य को समावेशी विकास के लिए प्रेरित करता है । 

 

वर्तमान मेंसरकार के द्वारा मिशन अंत्योदय के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों के सामाजिक क्षेत्र से संबंधित स्कीमों का विलय करने का प्रयास किया गया ताकि समाज के जरूरतमंद व्यक्तियों को सर्वांगीण लाभ प्राप्त हो सके| सरकार के द्वारा सबका साथ, सबका विकास एवं सबका विश्वास दीनदयाल उपाध्याय के विचारधारा से प्रेरित है|